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गोत्र सूची।
हर प्रमुख गोत्र और उसके ऋषि।

गोत्र आपके पिता की वंश-रेखा है, जो किसी प्राचीन ऋषि तक जाती है। यहाँ प्रमुख गोत्रों की सूची है, हर गोत्र किस ऋषि से जुड़ा है, क्या सगोत्र विवाह कानूनी है, और गोत्र रिश्ते के बारे में क्या नहीं बता सकता।

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संक्षेप में

  • गोत्र = पिता से संतान को मिलने वाली वंश-रेखा, जो किसी ऋषि तक जाती है।
  • सप्तर्षि, जिनका नाम बृहदारण्यक उपनिषद में आता है (गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप और अत्रि), और अक्सर अगस्त्य भी, ज़्यादातर गोत्र-सूचियों का आधार हैं।
  • सगोत्र विवाह कानूनी है। बहुत-से परिवार परंपरा के तौर पर इससे बचते हैं।
  • गोत्र रिश्ते की जाँच नहीं है। माँ की ओर के रिश्तेदारों का गोत्र आमतौर पर अलग होता है।

गोत्र का अर्थ

संस्कृत शब्द "गोत्र" का मूल अर्थ गोशाला या झुंड था, जो समय के साथ वंश या कुल के अर्थ में इस्तेमाल होने लगा: यानी एक पूर्वज से पुरुष-वंश में चले सभी लोग। हर गोत्र का नाम उस वंश के शीर्ष ऋषि पर है। संतान को पिता का गोत्र मिलता है, और बहुत-से परिवारों में विवाह के बाद स्त्री पति का गोत्र अपनाती है।

एक ही गोत्र के नाम कई समुदायों और क्षेत्रों में मिलते हैं, इसलिए गोत्र कोई जाति नहीं है।

प्रमुख गोत्र

गोत्रऋषि
कश्यप
Kashyap
ऋषि कश्यप
शाण्डिल्य
Shandilya
ऋषि शाण्डिल्य
भारद्वाज
Bharadwaj
ऋषि भरद्वाज
वत्स
Vatsa
ऋषि वत्स
अत्रि
Atri
ऋषि अत्रि
गौतम
Gautam
ऋषि गौतम
पराशर
Parashar
ऋषि पराशर
कौशिक
Kaushik
ऋषि विश्वामित्र (कौशिक)
कौण्डिन्य
Kaundinya
ऋषि कौण्डिन्य
गर्ग
Garg
ऋषि गर्ग
विश्वामित्र
Vishwamitra
ऋषि विश्वामित्र
मुद्गल
Mudgal
ऋषि मुद्गल
वशिष्ठ
Vashishtha
ऋषि वशिष्ठ
जमदग्नि
Jamadagni
ऋषि जमदग्नि
आंगिरस
Angirasa
ऋषि अंगिरा
भृगु
Bhrigu
ऋषि भृगु
हारीत
Harita
ऋषि हारीत
अगस्त्य
Agastya
ऋषि अगस्त्य
उपमन्यु
Upamanyu
ऋषि उपमन्यु
कपिल
Kapil
ऋषि कपिल

और भी बहुत-से गोत्र हैं, और परंपराएँ उन्हें इन ऋषियों के अंतर्गत अलग-अलग तरीकों से रखती हैं। अगर आपका गोत्र यहाँ नहीं है, तो नीचे के नियम फिर भी लागू होते हैं।

क्या एक ही गोत्र में शादी हो सकती है?

परंपरा के अनुसार बहुत-से हिंदू परिवार इससे बचते हैं, क्योंकि एक ही गोत्र के लोगों को एक पूर्वज की संतान माना जाता है। कुछ समुदाय, ख़ासकर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में, माँ और दादी-नानी के गोत्र से भी बचते हैं।

भारतीय कानून सगोत्र विवाह पर रोक नहीं लगाता। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में गोत्र का कोई ज़िक्र नहीं है। अधिनियम सपिंड रिश्तों (पिता की ओर से पाँच और माता की ओर से तीन पीढ़ियाँ) और कुछ नज़दीकी रिश्तेदारों, जैसे पहले चचेरे-ममेरे भाई-बहनों, के बीच विवाह पर रोक लगाता है, जब तक कोई मान्य प्रथा इसकी अनुमति न दे। Sapinda rule (English)

दो गोत्रों को मिलाकर देखना चाहते हैं? Gotra match checker

क्या एक गोत्र का मतलब रिश्तेदार होना है?

गोत्र सिर्फ़ पिता की वंश-रेखा को दिखाता है। माँ की ओर के भाई-बहनों (जैसे मामा या मौसी के बच्चों) का गोत्र आमतौर पर अलग होता है। इसलिए अलग गोत्र होने का मतलब यह नहीं कि आप रिश्तेदार नहीं हैं। दो लोग असल में कितने करीबी रिश्तेदार हैं, यह सिर्फ़ DNA जाँच बता सकती है।

स्रोत

  1. Brihadaranyaka Upanishad 2.2.6 (the seven rishis)
  2. Hindu Marriage Act, 1955 (India Code)
  3. Delhi High Court upholds sapinda marriage prohibition (LiveLaw, January 2024)

अलग गोत्र। फिर भी एक परिवार?

गोत्र सिर्फ़ पिता की ओर की वंश-रेखा देखता है। मुफ़्त DNA जाँच दोनों परिवारों की हर शाखा की तुलना करती है, आपके ब्राउज़र में, कुछ ही सेकंड में।

रिश्ता जाँचें

गोत्र से जुड़े सवाल

गोत्र का अर्थ क्या है?

गोत्र पिता की वंश-रेखा है, जो किसी प्राचीन ऋषि तक जाती है। संस्कृत में इस शब्द का मूल अर्थ गोशाला या झुंड था, जो आगे चलकर वंश या कुल के अर्थ में इस्तेमाल होने लगा।

क्या एक ही गोत्र में शादी कानूनी है?

हाँ। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 सगोत्र विवाह पर रोक नहीं लगाता। अधिनियम सपिंड रिश्तों और कुछ नज़दीकी रिश्तेदारों के बीच विवाह पर रोक लगाता है, जब तक कोई मान्य प्रथा अनुमति न दे। बहुत-से परिवार परंपरा के तौर पर सगोत्र विवाह से बचते हैं।

अपना गोत्र कैसे पता करें?

पिता की ओर के बुज़ुर्गों या परिवार के पुरोहित से पूछें। गोत्र अक्सर कुंडली, जनेऊ या विवाह के कागज़ों में लिखा होता है। अगर गोत्र मालूम न हो, तो एक आम परंपरा कश्यप गोत्र मानने की है।

क्या अलग गोत्र का मतलब है कि हम रिश्तेदार नहीं हैं?

नहीं। गोत्र सिर्फ़ पिता की वंश-रेखा देखता है, इसलिए माँ की ओर के रिश्तेदारों का गोत्र आमतौर पर अलग होता है। असल रिश्ता सिर्फ़ DNA जाँच से पता चलता है।