थैलेसीमिया क्या है?
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं का वह प्रोटीन है जो शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाता है। थैलेसीमिया में हीमोग्लोबिन बनाने वाले जीन ठीक से काम नहीं करते। यह छूत की बीमारी नहीं है; यह माता-पिता से जीन के ज़रिए बच्चों में आती है।
थैलेसीमिया माइनर और मेजर में फ़र्क
- थैलेसीमिया माइनर (ट्रेट): दो में से एक जीन बदला हुआ। व्यक्ति आमतौर पर स्वस्थ रहता है; खून की जाँच में लाल कोशिकाएँ छोटी दिख सकती हैं। यह कभी मेजर में नहीं बदलता।
- थैलेसीमिया मेजर: दोनों जीन बदले हुए। गंभीर खून की कमी, जिसमें आमतौर पर जीवन भर खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है।
भारत में कितना आम है?
भारत में औसतन 3.5 से 4% लोग बीटा-थैलेसीमिया के वाहक हैं, यानी लगभग हर 25 से 30 में से एक। कुछ समुदायों में यह 17% तक है। अनुमान है कि भारत में हर साल 10,000 से 12,000 बच्चे गंभीर हीमोग्लोबिन विकारों के साथ जन्म लेते हैं। ज़्यादातर वाहकों को पता ही नहीं होता कि वे वाहक हैं।
अगर दोनों साथी वाहक हों
| हर गर्भावस्था में संभावना | बच्चे में |
|---|---|
| 4 में से 1 | न ट्रेट, न बीमारी |
| 4 में से 2 | थैलेसीमिया माइनर, माता-पिता जैसा |
| 4 में से 1 | थैलेसीमिया मेजर |
अगर सिर्फ़ एक साथी वाहक है, तो बच्चे को इस जोड़ी से थैलेसीमिया मेजर नहीं होता। इसीलिए दोनों की जाँच ज़रूरी है।
जाँच कैसे होती है?
- CBC: छोटी लाल कोशिकाएँ (कम MCV और MCH) पहला संकेत हैं।
- HbA2 (HPLC या इलेक्ट्रोफोरेसिस): लगभग 3.5% से ज़्यादा HbA2 बीटा-थैलेसीमिया ट्रेट दिखाता है। यही मुख्य पुष्टि वाली जाँच है।
- NESTROFT: एक सस्ती स्क्रीनिंग जाँच। पॉज़िटिव आए तो HPLC से पुष्टि ज़रूरी है।
- DNA जाँच: अल्फ़ा थैलेसीमिया के लिए अक्सर ज़रूरी, क्योंकि उसमें HPLC सामान्य आ सकता है।
आयरन वाली आम गलती
छोटी लाल कोशिकाएँ आयरन की कमी में भी दिखती हैं, इसलिए वाहकों को अक्सर महीनों तक आयरन दे दिया जाता है, जिससे कोई फ़ायदा नहीं होता। अगर आयरन लेने के बाद भी रिपोर्ट नहीं सुधरती, तो डॉक्टर से थैलेसीमिया जाँच के बारे में पूछें।
अगर दोनों वाहक निकलें
शादी तोड़ने की ज़रूरत नहीं है। गर्भावस्था की शुरुआत में जाँच, IVF के साथ भ्रूण की जाँच, या पूरी जानकारी के साथ आगे बढ़ना, जैसे कई विकल्प हैं। एक जेनेटिक काउंसलर हर विकल्प समझा सकता है। ज़रूरी बात है समय रहते पता होना।
यह सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं। अपनी रिपोर्ट के बारे में डॉक्टर या जेनेटिक काउंसलर से बात करें।